नई दिल्ली: भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार आने वाले समय में और महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि विदेशी पूंजी को भारतीय बाजार की ओर आकर्षित करने के लिए शुरू किए गए उपाय केवल शुरुआत हैं और निवेश बढ़ाने के लिए आगे भी कई कदम उठाए जाएंगे।
हीरो माइंडमाइन समिट 2026 को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) में विदेशी निवेशकों को ब्याज और पूंजीगत लाभ कर में दी गई छूट विदेशी पूंजी को वापस आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
‘विदेशी पूंजी की जरूरत, आगे भी होंगे सुधार’
निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत को विकास की गति बनाए रखने के लिए अधिक विदेशी पूंजी की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निवेश बढ़ाने के लिए सरकार की रणनीति लगातार आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में अतिरिक्त उपाय भी लागू किए जाएंगे।
उनके अनुसार, विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत करने और पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए वित्तीय क्षेत्र में कई सुधारों पर काम किया जा रहा है।
आरबीआई की नई व्यवस्था से बैंकों को राहत
वित्त मंत्री ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में बैंकों को तीन से पांच वर्ष की अवधि वाले विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (बैंक) जमा के लिए विशेष मुद्रा अदला-बदली सुविधा उपलब्ध कराई है। इसके तहत बैंक अमेरिकी डॉलर जमा को आरबीआई के साथ विनिमय कर सकेंगे और मुद्रा जोखिम का बेहतर प्रबंधन कर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि आरबीआई के घोषित ढांचे के तहत मुद्रा जोखिम की लागत केंद्रीय बैंक वहन करेगा, जिससे बैंकों के लिए विदेशी संसाधन जुटाना आसान होगा।
सार्वजनिक उपक्रमों को भी मिलेगा लाभ
विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को विदेशों से वाणिज्यिक ऋण जुटाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए रियायती विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जो 30 सितंबर तक प्रभावी रहेगी।
सरकार का मानना है कि इससे सार्वजनिक उपक्रमों को कम लागत पर विदेशी संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी और निवेश गतिविधियों को गति मिलेगी।
वैश्विक चुनौतियों के बीच सतर्कता जरूरी
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी कच्चे तेल, कच्चे माल और उर्वरकों के आयात पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर देश पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि दुनिया की आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। हर सप्ताह नए जोखिम और चुनौतियां सामने आ रही हैं, इसलिए भारत को हर संभावित परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा।
जून में विदेशी निवेशकों की बड़ी बिकवाली
इस बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंकाओं और रुपये में कमजोरी के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने जून के पहले पखवाड़े में भारतीय शेयर बाजार से 62,853 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से एफपीआई की कुल निकासी 2.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा पूरे वर्ष 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से भी अधिक है।
